AIMS AND OBJECTS OF PUNJABI HINDU ASSOCIATION, JABALPUR


(A) The main object of the Association shall be to promote the social, cultural and religious activities and perform all festivals and functions for charitable purposes. The earnings of the Association shall be exclusively utilised for social, cultural and religious activities.

(B) The Association has constructed a Community Hall, which is opened to all communities for stay of Barat and performance of other social functions. The building is being utilized exclusively for public charity as Dharmshala and does not support any commercial activity.

(C) The Association is maintaining and operating a Muktivahan which is available to all communities totally free of charge without any distinction of caste and creed. (D) Maintain the temple situated in the premises of the Association for worship by general public.

(E) Organise cultural programmes in a public place common for all sections of the society.

(F) Organise various other religious functions.

(G) Publication of a periodical & develop electronic media with a view to foster religious, social and ethical values among the members of the Association as well as affiliated similar institutions.

(H) Organise social upliftment functions.

(I) Provide financial aid to weaker sections of the society

(J) To organize, promote and develop education by opening educational Institutions and Schools for general public.

(K) To distribute scholarship, book, stationery to needy children of weaker sections of the society.

(L) To open a library and reading room for general public

(M) To provide medical facilities by opening dispensaries, hospitals, medical check up and blood donation camps etc.

(N) To prepare and enlist members of blood donors brigade and encourage eye donations.

(O) To help mitigate sufferings and provide disaster relief during natural calamities.

(P) Any other activity which the Association may consider in future expedient to achieve the above mentioned aims and objects and for general uplift of religious, social, economic and ethical values of the society.

 

पंजाबी हिन्दू एसोसिएन, जबलपुर - सफरनामा


पंजाबी हिन्दू एसोसिएन, जबलपुर का मुख्य उद्देष्य सदस्यों को एक धारा में जोड़ना है। देश के 1947 के विभाजन के पष्चात् पष्चिमी पाकिस्तान से निष्कासित होकर भारत में आकर अलग-अलग स्थानों पर पुनर्वासित होते चले गये पंजाबियों में भी इस बात की परिकल्पना रही है कि उन्हें सामाजिक रिष्ते तथा मेल मिलाप के लिए सामाजिक संगठन का निर्माण करना चाहिए। जबलपुर में पंजाबियों को संगठित करने तथा एकरूपता लाने की दिषा में आज से सत्तर वर्ष पूर्व समाज के पथ-प्रदर्षकों ने ऐड़ी-चोटी की अथक मेहनत और एक संकल्प शक्ति के वास्तविक भाव को साकार रूप देने का सारगर्भित प्रयास अपनी दृढ़ इच्छा षक्ति के माध्यम से किया। पंजाबी हिन्दू एसोसिएन, जबलपुर में सुरक्षित दस्तावेज इन प्रयासों के प्रत्यक्ष एवं मौन गवाह हैं। दस्तावेजों में उल्लेखित विवरण संस्था के शुभारंभ की कहानी स्पष्ट रूप से दर्षाते हैं कि किस तरह जबलपुर के पंजाबियों ने सामाजिक संगठन के निर्माण को मूर्त रूप से स्थापित करने में सफलता अर्जित की। सन् 1934 में 17 मार्च को सामाजिक संगठन की पहली वृहत बैठक संपन्न हुई जिसमें समाज के वरिष्ठों द्वारा संगठन की आवष्यकता को विस्तार से प्रतिपादित किया गया। तभी उसका गठन भी कर दिया गया। कालान्तर में 29 जून 1934 को पंजाबी प्रेम मंडल के नाम से एक संगठन की बैठक आयोजित की गई जिसमें संस्था के श्री प्रकाश चन्दर, श्री एन महंत, श्री भगवान सिंह राव इत्यादि की उपस्थिति उल्लेखनीय रहीं। 17 मार्च 1934 के पष्चात् जैसे-जैसे सामाजिक संगठन की उपादेयता पर समाज के सदस्यों को ध्यान आकृष्ट होता गया वे इसके नजदीक आते चले गये। सबके दिलों दिमाग में सिर्फ इस आशय के संकल्प की मषाल जल रही थी कि समाज के लोगों को जोड़ने के लिए संगठन को समर्थ्र तथा शक्तिवान बनाया जाये। तकरीबन एक वर्ष के उपरांत 13 जनवरी 1935 को संस्था के आधार-स्तंभों को संस्था कार्यालय हेतु जमीन चयन की आवष्यकता महसूस हुई और सबकी सूझबूझ से यह तय किया गया कि सर्वप्रथम संगठन कार्यालय की महती आवष्यकता को दर्षाते हुये नगर-निगम, जबलपुर को भूमि आवंटन हेतु पत्र लिखा जाये।


सर्वसम्मति से नगर-निगम, जबलपुर को भूमि आवंटन हेतु एक पत्र लिखा गया। उस समय संस्था का सचिव पद मानसेवी रूप से श्री आर.डी. मेहता संभाले हुए थे। नगर-निगम, से कोई जबाव न मिलने पर तथा एक वर्ष के इंतजार के पष्चात् संस्था के संस्थापकों द्वारा 21 जून 1936 को पंजाबी हिन्दू एसोसिएन के कार्यालय हेतु भवन रेल्वे चौथे पुल के पास श्री चोधरी के बंगले में बीस रूपये प्रतिमाह किराये की दर से लिया। संस्था का कार्य कार्यालय प्रारंभ होने के परिणाम स्वरूप व्यवस्थित हो गया और उसके क्रियाकलापों को गति मिली।


सामाजिक संगठन की गतिविधियों तथा संगठन को मिले स्नेह को ध्यान में रखते हुए संस्था को पंजीकृत कराने की पहल 8 अगस्त 1936 को प्रारंभ की गई। दूसरी ओर 1 अगस्त 1938 को श्री चौधरी के बंगले से संस्था कार्यालय हटा दिया गया तथा स्थायी कार्यालय हेतु जमीन आवंटन के प्रयास प्रारंभ हो गये। इसी दौरान स्थायी भवन हेतु भूमि क्रय करने के उद्देष्य से 3 अगस्त 1938 को सर्वश्री हरीराम, लभ्भूराम शर्मा राम लाल धनसंग्रह हेतु बम्बई गये। कोष में आर्थिक सहयोग निधि का विस्तार होने लगा। 21 नवम्बर 1938 तक भवन निर्माण कोष में लाला लक्ष्मण दास, श्री रामस्वरूप एवं सहयोगियों ने दानस्वरूप सहयोग राशि प्रदान की। इसी बीच जमीन आवंटन की कार्यवाही को पूर्ण करा लिया गया। धीरे धीरे आर्थिक निधि उदार मन से पंजाबी समाज के सहयोगियों से प्राप्त होने लगी। समाज के सदस्यों के उत्साह पूर्ण माहौल को दृष्टिगत रखते हुये 20 नवम्बर 1938 को समाज के सभी सदस्यों की सामान्य सभा बुलाई गयी। खुले पण्डाल में संपन्न हुई इस बैठक ने संगठन को और अधिक संबल प्रदान किया। आगे चलकर 16 अप्रैल 1942 में मदन-महल हेल्थ कैम्प में लीज पर जमीन प्राप्ति हेतु पंजीयन हुआ। सामाजिक सांस्कृतिक गतिविधियॉं भी चलती रहीं। समाज में एक-दूसरे का सहयोग भी मिलने लगा। 17 मार्च 1955 को सारे कार्यों को व्यवस्थित दिषा मिलने की धारणा को ध्यान में रखते हुये तीन उपसमितियों का गठन किया गया। गोरखपुर व नर्मदा रोड में एक उपसमिति, दूसरी नेपियर टाऊन तथा तीसरी उपसमिति का गठन शहरी क्षेत्र के लिए किया गया। समाज की एक असाधारण हस्ती और उद्भट समाज सेवी पंडित बनारसी दास भनोत जिनके मन में स्थायी भवन के निर्माण का दर्द रहा, वे इस दिषा में आगे आये। 13 अगस्त 1957 को बारात घर, भवन, क्लब के निर्माण हेतु नींव में आने वाले व्यय का भार पंडित जी द्वारा वहन करने की घोषणा की गई जिसका समाज के सभी वर्गों ने सर्वत्र स्वागत किया। पंडित जी द्वारा भवन निर्माण के लिए भूमि पूजन के लिए दषहरा का शुभ मुहूर्त निकाला गया। 3 अक्टूबर 19 57 को नये भवन निर्माण का भूमि पूजन पूर्ण विधि विधान, वेदमंत्रों, शंख ध्वनि की गूॅंज के बीच संपन्न हुआ। भवन की नींव का कार्य उसी दिन से प्रारंभ हुआ। भूमि पूजन के दौरान पंजाबी बिरादरी के तकरीबन 600 सदस्यों की गौरवमयी उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। उनका स्वागत भी शानदार तरीके से किया गया। समारोह पूर्ण रूप से एक उत्सव के रूप में आयोजित किया गया। संस्था की सारी गतिविधियों का संचालन उस समय के तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजेन्द्रनाथ वासुदेव एवं श्री एस. एल. भसीन, सचिव संचालित कर रहे थे। कालांतर में बारात घर (जंजघर) के निर्माण के लिए मासिक चन्दा भी एकत्रित होने लगा। पुराना भवन स्वर्गीय श्री भगत राम शुक्ला, अंबाला केन्ट की पुण्य स्मृति में तथा हाल सर्व श्री एच. कोछड, रमा कुमार की स्मृति में बनाया गया। 8 मई 1963 को नये भवन का शुभारंभ पंजाब के मुख्यमंत्री श्री प्रताप सिंह कैरो के मुख्य अतिथ्य एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भगवंत राव मण्डलोई की अध्यक्षता में संपन्न हुआ जिसमें जबलपुर के गौरव म.प्र. शासन के मंत्री श्री जगमोहन दास की उपस्थिति उल्लेखनीय रही। पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर के नये भवन का शुभारंभ हो जाने से सामाजिक गतिविधियों में तेजी आई। सामाजिक गतिविधियों तथा धार्मिक आयोजनों में दुगने उत्साह का माहौल बना। समाज के मेल मिलाप का केन्द्र नया भवन हो गया। पंजाबी समाज में समग्रता और चेतना जागृति का एक शानदार दौर चला। एक दूसरे की प्रतिभा को लोगों को पहचानने का अवसर मिला। उदीयमान प्रतिभाओं का मूल्यांकन हुआ तथा यथोचित प्रोत्साहन भी मिलने लगा। संस्था के सीमित साधनों को उतार-चढ़ाव का सामना करना ही पड़ा। किन्तु सभी वर्गों का असीम सहयोग मिला। शादी ब्याह एवं विविध कार्यक्रमों में भवन की जगह सदस्यों की संख्या को देखते हुये कम पड़ने लगी। इसी कड़ी में संस्था में प्रथम मंजिल के निर्माण का निर्णय लिया गया। 19 मार्च 1973 को प्रथम मंजिल के निर्माण की कार्यवाही को प्रारंभ किया गया। शादी ब्याह में आने वाली कठिनाई को दृष्टिगत रखते हुये 26 फरवरी 1989 में पंजाबी डायरेक्टरी का प्रकाषन सर्वश्री मनोहरलाल साहनी, जे.एन.भल्ला, जे.एम.कुमार, राममूर्ति वर्मा, के सहयोग से किया गया।


1934 में स्थापित संस्था में निरंतर बारात घर की मांग उठती रही। आवष्यकताओं के अनुरूप जब सदस्य एक स्थान पर बैठकर चर्चा करते तो उन्हें हमेषा बारात घर की कमी खलती थी। बारात घर की योजना सबके दिलो दिमाग को कुरेदने लगी। बारात घर का निर्माण 1958 में पूर्ण हुआ। 28 अक्टूबर 1958 को डॉ. के.सी. कुमार के करकमलों से बारात घर का उद्घाटन समारोह सम्पन्न हुआ। कहते हैं आवष्यकता आविष्कार की जननी है। समाज के सदस्यों की बढ़ती संस्था के अनुरूप ही 1986 एवं 1995 में भवन निर्माण तथा विस्तार के कार्य होते चले गये।


सन् 2013-14 में भवन के एक भाग का नवीनीकरण करते हुए सीनियर सिटीजन डे केयर सेंटर हेतु एक हाल, दो कमरे, किचन, बाथरूम आदि का भव्य निर्माण कार्य अध्यक्ष श्री चन्द्रकुमार भनोत द्वारा अत्यन्त उत्साह एवं दूरदर्षिता से अथक प्रयासों से सम्पन्न कराया गया।


सन् 2015-16 में नये भवन के ऊपर 6 कमरे व हाल का निर्माण एवं लिफ्ट का निर्माण अध्यक्ष श्री नरेन्द्रपाल मलिक के कार्यकाल में संस्था के सर्वथा समर्थ एवं गणमान्य पूर्व मंत्री श्री चन्द्रकुमार भनोत के मार्गदर्षन में अथक प्रयासों से किया गया।


पंजाबी हिन्दू एसोसिएन की स्थापना में जिन्होंने रात-दिन एक कर अथक् परिश्रम से संस्था का निर्माण किया ऐसे गौरवमयी सदस्यों का नाम उल्लेखित करने में हमें प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। संस्था की आधारषिला के रूप में जिन असाधारण महापुरूषों ने संस्थापक सदस्य के गरूतर भार को संभालने में अहम् भूमिका निभाई उनमें इनका नाम अग्रण्य हैं :-


प््रा. हरीराम मल्होत्रा, श्री सेट मथुरादास, श्री आर एन महंत, श्री पी डी शर्मा, श्री कौषिक, श्री सदानंद, श्री हंसराज, श्री त्रिलोकीनाथ कोछड, श्री जोडियाल, श्री चिरौंजीलाल शर्मा, श्री डी सी वर्मा, श्री पी आर गोयल, श्री आर डी मेहता, श्री साहनी, श्री सेठी, श्री वी डी बक्षी, श्री ए सी जोषी, श्री मेहरचंद्र, श्री आनंद, श्री प्रेमनाथ, श्री भगवत सिंह, श्री दिवयंत, श्री लक्ष्मण दास, श्री केषर सिंह, श्री गुरूचरण दास, श्री यम्मन सिंह, श्री दौलत राय, श्री करन सिंह, श्री एल सी कपूर, श्री महेषचंद्र, श्री नरसिंह राय, श्री भगत राय, श्री बलवंत सिंह, श्री डी आर कौषल, श्री ए एन महंत, श्री परमानंद, श्री सी एल शर्मा, श्री हरनाम सिंह, श्री ईष्वर सिंह, श्री आर के मदान, श्री ए एस गरेवाल, श्री पी आर खन्ना, श्री दिलीप सिंह, श्री सम्पूरन सिंह, श्री बेनीराम, श्री पी एल बहल, श्री एच पी डी आहूजा, श्री के एल लुम्बा, पंडित बनारसी दास भनोत, श्री राजपाल भाटिया।


पंजाबी हिन्दू एसोसिएन इतिहास के आईने में समाजसेवी जिन्होंने संस्था की बागडोर संभाली


पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन की स्थापना वर्ष 1934 में हुई। संस्था की स्थापना के पष्चात् संस्था के व्यवस्थित संचालन हेतु समाज की अनेक उदीयमान प्रतिभाओं (कृपया संलग्न विवरिणी का अवलोकन करें) ने इसका नेतृत्व किया तथा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव, कोषाध्यक्ष तथा आॅडीटर एवं कार्यकारिणी समिति के विभिन्नों पदों कोे सुषोभित किया।

पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन जबलपुर के विभिन्न सामाजिक क्रियाकलाप


पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन, जबलपुर के उद्देष्यों एवं ध्ययों के अनुरूप वर्तमान में निम्नांकित मुख्य सामाजिक क्रियाकलापों का संचालन किया जा रहा है:-

सामुदायिक भवन का संचालन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन जबलपुर द्वारा विषाल सामुदायिक भवन का निर्माण किया गया है जिसका उपयोग समाज के सभी वर्गों द्वारा बिना किसी भेदभाव के बारातों के रूकने तथा अन्य सामाजिक उत्सवों के आयोजन हेतु बिना किसी वाणिज्यक उद्देष्य के किया जाता है। भवन में दो विषाल हाॅल, 23 ए.सी. कमरे, 2 मिनी हाॅल, आॅफिस, पार्किंग स्थल आदि हैं जिसका निरन्तर अनुरक्षण एवं विस्तार किया जा रहा है।

समाज सेवा हेतु मुक्ति-वाहन का निःषुल्क संचालन


समाज सेवा के उद्देष्य से पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन जबलपुर द्वारा सन् 2000 से एक मुक्ति-वाहन का संचालन किया जा रहा है जो समाज के सभी वर्गों के सदस्यों को बिना किसी वर्ग या जाति के भेदभाव के निःषुल्क प्रदान किया जा रहा है। इस नेक निःषुल्क परमार्थक कार्य की समाज के सभी वर्गों द्वारा मुक्त कंठ से प्रषंसाा होती रहती है।


वातानुकूलित शव-संरक्षण पेटिका का निःषुल्क प्रदाय निःस्वार्थ


समाज सेवा के उद्देष्य से पंजाबी हिन्दू एसोसिएशन जबलपुर द्वारा तीन वातानुकूलित शव संरक्षण पेटिकायें समाज के सभी वर्गों को बिना किसी वर्ग या जाति के भेदभाव के निःषुल्क प्रदान की जा रही है। यह निःषुल्क सेवा भी सन् ...............से निरंतर गतिमान है।

 

हेमोडायलिसिस यूनिट का संचालन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन जबलपुर द्वारा समाज सेवा के उद्देष्य से सन् 2012 से पी. पी.पी. के तहत् दो हेमोडायलिसिस मषीनों का संचालन जिला अस्पताल जबलपुर में बिना किसी लाभ तथा बिना हानि लाभ के आधार पर निरन्तर किया जा रहा है। उपरोक्त यूनिट में मरीजों का हेमोडायलिसिस प्रथम आयें प्रथम पायें के आधार पर बिना किसी जाति, धर्म या वर्ग के भेदभाव के किया जाता है। प्रतिवर्ष मरीजों की लगभग 2,400 हेमोडायलिसिस करके समाज सेवा के इस परोपकारी कार्य का निर्बाध रूप से निष्पादन किया जा रहा है। इस कार्य हेतु संस्था ने अपनी निधि से लगभग 15 लाख रूपये व्यय करके उपरोक्त दो हेमोडायलिसिस मषीनें लगाई हैं जिनका संचालन संस्था के कार्यकर्ताओं की देखरेख में समाजसेवी नेफ्रोलाॅजिस्ट एवं उनके तकनीकी सहयोगियों की सहायता से किया जाता है। संस्था के इस परोपकारी कार्य का समस्त वर्गों द्वारा मुक्त कंठ से प्रषंसा की जा रही है।


वरिष्ठ नागरिक डे केयर सेंटर का संचालन


वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल, मनोरंजन, उनके समय के सदुपयोग आदि की दृष्टि से पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा संस्था भवन में एक भव्य वरिष्ठ नागरिक डे केयर सेंटर का सन् 2013 से संचालित किया जा रहा है। इस डे केयर सेंटर में सर्व सुविधायुक्त एक वृहद् वाचनालय, दो बड़े कमरे, किचन, दो शौचालय आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करके उपलब्ध कराये गये हैं। वरिष्ठ नागरिकों के मनोरंजन हेतु इस सेंटर में एल सी डी, टी वी, कैरम बोर्ड, शतरंज, पत्र-पत्रिकाएॅं एवं रेफ्रिजरेटर, शुद्ध जीवाणुरहित जल आदि की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। डे केयर सेंटर सुबह 10 बजे से रात्रि 8 बजे तक वरिष्ठ नागरिकों हेतु खुला रहता है। समाज के अनेक वरिष्ठ नागरिक इस डे केयर सेंटर में उपलब्ध सुविधाओं का निरंतर लाभ उठा रहे हैं तथा मनोरंजन के साथ-साथ अपने मानसिक तथा शारीरिक स्वास्थ्य मेें प्रगति कर रहे हैं।


सामाजिक पत्रिका का प्रकाषन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा एक सामाजिक मासिक पत्रिका ‘‘मध्यप्रदेश ज्योति’’ का पिछले दो से अधिक दषकों से प्रकाषन किया जा रहा है जिसमें एसोसिएषन की विविध गतिविधियों, सामाजिक लेख, कवितायें, प्रेरक प्रसंग इत्यादि के अतिरिक्त वैवाहिक सहायता केन्द्र द्वारा प्रतिमाह नये पंजीयनों का विवरण नियमित रूप से प्रकाषित किया जाता है। ‘‘मध्यप्रदेश ज्योति’’ संस्था के सभी सदस्यों, वैवाहिक सहायता केन्द्र में पंजीयत अभ्यर्थियों, अन्य संस्थाओं आदि को डाक द्वारा प्रेषित की जाती है।


वैवाहिक परिचय सम्मेलन का आयोजन


पंजाबी समाज भारतवर्ष के विभाजन के पष्चात् देश के विभिन्न हिस्सों में उस समय की परिस्थितियों के मुताबिक जिसको जिस दिषा में घरौंदा बसाने की जगह मिली वहाॅं बसता चला गया और उसी क्षेत्र के ताने-बाने में रंगता भी चला गया। किन्तु जब भी पंजाबियों को अपने विवाह योग्य पुत्र अथवा पुत्री का विवाह करना होता है तब उनका यही प्रयास होता है कि भावी वर-वधु के अनुरूप उन्हें भी पंजाबी समाज का फलता फूलता और सुसंस्कृत परिवार मिल जाये। सवाल आता है कि इस उद्देष्य हेतु इस माध्यम से संपर्क स्थापित किया जाये तथा योग्य एवं सुसंस्कृत भावी वर-वधु की जानकारियाॅं कैसे मिलें? जबलपुर की पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन ने इस समस्या को गंभीरता से लिया और पंजाबी समाज के परिवारो के बीच परिचय के अभाव को दूर करने के लिए पंजाबी समाज के जवाबदार लोगों में भी चेतना जागृत हुई। युवक-युवतियों के विवाह हेतु परिचय सम्मेलन प्रारंभ करने की योजना बनने लगी। इन कठिनाईयों को दृष्टिगत रखते हुये जबलपुर पंजाबी समाज ने पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन के मंच से श्री मनोहर लाल साहनी के नेतृत्व में अनेक सामाजिक सुधार के कार्य किये जिसमें सर्वप्रथम जबलपुर के पंजाबी समाज के परिवारों का सर्वेक्षण कराकर पंजाबी डायरेक्ट्री का प्रकाषन किया गया जो आगामी परिचय सम्मेलनों के आयोजन में सहायक बना।


अतीत के झरोखे से देखें तो हम पायेंगे कि जबलपुर में पहला सामाजिक परिचय सम्मेलन 10 नवम्बर 1991 में श्री हुकुम चन्द्र वाधवा के प्रयास से आयोजित किया गया जिसको समाज के जवाबदार लोगों ने भी अपनी स्वीकृति प्रदान की। परिचय सम्मेलन का प्रमुख उद्देष्य यह है कि विवाह योग्य युवक-युवतियाॅं अपने परिवार-जनों के साथ अन्य परिवारजनों से मिलें और अपनी-अपनी पसंद तय करके अपने रिष्ते तय करें।


परिचय सम्मेलन को सफल बनाने पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन द्वारा श्री राजपाल भाटिया, श्री मनोहर लाल साहनी एवं श्री अविनाश खत्री आदि के सहयोग से विभिन्न समीतियों का गठन किया गया था। प्रथम परिचय सम्मेलन का आयोजन भी सबके अथक प्रयासों से संपन्न हुआ। सम्मेलन की उपयोगिता पर सबने चिंतन मनन किया और इसे हमेषा आयोजित करते रहने पर भी बल दिया। सबको सुझाव पसंद आया और आगामी सम्मेलन की तैयारियाॅं होने लगी। सबके मन में ऐसा लगने लगा कि परिचय सम्मेलन देश विभाजन के पष्चात् पंजाबी समाज को जोड़ने का सषक्त माध्यम बन सकता है तथा इसके लाभप्रद पहलू को देखते हुये 13 अप्रैल 1992 को बैसाखी उत्सव पर द्वितीय परिचय सम्मेलन का भी शानदार ढंग से आयोजन किया गया। यह द्वि-दिवसीय विराट परिचय सम्मेलन 12 तथा 13 अप्रैल 1992 को आयोजित हुआ। हर तरह से सफल रहने वाले इस परिचय सम्मेलनों ने इस बात का अहसास करवा दिया कि इस भागदौड़ और आपा धापी भरे जीवन में परिचय सम्मेलन जैसे आयोजन निष्चित रूप से वर-वधु की जानकारी के लिए उपयोगी है। परिचय सम्मेलन को प्रारंभ करने में भी श्री मनोहर लाल साहनी, श्री हुकुमचंद वाधवा एवं अन्य वरिष्ठों का मार्गदर्षन सराहनीय रहा।


परिचय सम्मेलनों में समाज के अन्य जनों विषेषतौर पर सर्वश्री प्रेम अरोरा, एन. आर. खत्री, आषानंद बतरा, हरदयाल आहूजा, टेकचन्द्र लाम्बा, गिरधारी लाल अरोरा, लक्ष्मी चन्द्र साहनी, अरूण अरोरा, टी.एस.बेदी, जगदीश मित्र कुमार, जे.एल.भल्ला, श्रीमती शशि जावा, कु. निषा सूरी, कु. चंचल सूरी, श्रीमती प्रेम भाटिया, कु. सीमा सूद, रामी शर्मा, श्रीमती ढींगरा, श्री गुरूबख्श सूरी, श्रीमती कमलेश कोचर, श्री यषपाल ग्रोवर, श्री डी. पी. कोहली, श्री के. एल. कोहली, डाॅ. गुलषन माकन, श्रीमती मंजू माकन, श्रीमती वंदना बेदी, श्री विजय कपूर, श्रीमती कृष्णा कपूर, श्रीमती तृप्ति चोपड़ा, श्रीमती पायल विनायक, श्रीमती कमला खत्री, श्री प्रदीप वाधवा, श्री मन मोहन साहनी आदि का सराहनीय योगदान रहा है।


परिचय सम्मेलन सन् 1991 से निरंतर अत्यन्त वृहद रूप में पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन द्वारा आयोजित किये जा रहे हैं जिसमें आजकल लगभग 300 से अधिक युवक-युवतियाॅं लाभान्वित होते हैं तथा समाज के लगभग 1,200 लोग सक्रिय भाग लेते हैं। ये परिचय सम्मेलन दो दिवसीय आयोजित किये जाते हैं जिसमें दो दिनों तक युवक-युवतियों एवं उनके अभिभावकों हेतु निवास एवं भोजन की अत्यन्त अल्प राशि की फीस लेकर की जाती है। अभ्यर्थियों की सुविधा की दृष्टि से युवक - युवतियों का बायोडेटा टेलीविजन तथा उद्घोषणा द्वारा प्रसारित किया जाता है। आयोजन में जबलपुर, नागपुर, रायपुर, भोपाल, ग्वालियर, इन्दौर, आगरा इत्यादिक स्थानों पर संचालित समाज के मैरिज ब्यूरो के रिकार्ड भी प्रदर्षित किये जाते हैं तथा उपलब्ध कराये जाते हैं। सम्मेलन के दौरान युवक-युवतियों और उनके अभिभावकों को मिलाने व बातचीत कराने की भी व्यवस्था की जाती है।


वैवाहिक सहायता केन्द्र का संचालन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर में संचालित वैवाहिक सहायता केन्द्र का शुभारंभ जुलाई 1989 में संस्था के तत्कालीन अध्यक्ष श्री मनोहर लाल जी साहनी द्वारा किया गया था। पंजीयन युवक-युवतियाॅं विभिन्न वर्गों यथा सुषिक्षित, डाॅक्टर, इंजीनियर, एडवोकेट, उद्योगपति, व्यवसायी, शासकीय सेवारत्, विधुर, तलाकषुदा आदि के हैं। वर्तमान में वैवाहिक सहायता केन्द्र में लगभग 4,300 विवाह योग्य लड़के-लड़कियों का पंजीयन है। वैवाहिक सहायता केन्द्र में स्थाई कर्मचारी कार्यरत् हैं जो आगन्तुकों को उचित मार्गदर्षन देते हैं तथा युवक-युवतियों के फोटोयुक्त बाॅयोडाटा कार्ड समीक्षा हेतु उपलब्ध कराते हैं। वैवाहिक सहायता केन्द्र में अत्यंत अल्प शुल्क लेकर विवाह योग्य युवकों/युवतियों का पंजीयन किया जाता है। पंजीयत युवक/युवतियों का निःषुल्क पंजीयन वैवाहिक बेवसाइट में भी किया जाता है तथा उन्हें संस्था की सामाजिक पत्रिका ‘‘मध्यप्रदेश ज्योति’’ एक वर्ष तक निःषुल्क पे्रषित की जाती है जिसमें उनका बायोडेटा एक माह निःषुल्क प्रकाषित किया जाता है।


वैवाहिक वेबसाइट का संचालन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन द्वारा जबलपुर में सन् 2004 से वैवाहिक वेबसाइट का संचालन किया जा रहा है जिसमें पंजाबी समाज के देश विदेश के लगभग 4,300 युवक-युवतियों के बायोडेटा उनके फोटोग्राफ सहित उपलब्ध हैं। वेबसाइट ूूूण्चींरइचण्बवउ पर लाॅगइन करके देखी जा सकती है। वेबसाइट में आॅनलाइन पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। इसके अतिरिक्त संस्था के वैवाहिक सहायता केन्द्र तथा संस्था द्वारा आयोजित परिचय सम्मेलनों के माध्यम से भी इस वेबसाइट में पंजीयन किया जा सकता है। वेबसाइट में विवाह योग्य प्रत्याशियों का विस्तृत विवरण, वैवाहिक स्थिति, लिंग, मांगलिक/नाॅन मांगलिक, जाति, उपजाति, गोत्र, कद, वर्ण, योग्यता, जन्मविवरण, व्यवसाय, नौकरी, आय, पैतृक व पारिवारिक विवरण उपलब्ध है। वेबसाइट में आवष्यक फिल्टर्स के माध्यम से सर्च आॅप्सन उपलब्ध कराये गये हैं ताकि शीघ्रता से योग्य जोड़ियों का मिलान व चुनाव हो सके।
उपरोक्त वेबसाइट में संस्था के उद्देष्य, इतिहास, गतिविधियां, कार्यकारिणी समिति का विवरण, पंजाबी समाज की प्रतिभाओं की जीवनी व उनका योगदान, संस्था की सामाजिक मासिक पत्रिका ‘‘मध्यप्रदेश ज्योति’’ की प्रति का प्रकाषन, वेबसाइट में पंजीयन की पद्धति आदि का विस्तृत रूप से समावेश किया गया है।


संस्था के अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक/सांस्कृतिक कार्यक्रम


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा समाज को एक सूत्र में बांधकर संगठित करने के उद्देष्य से प्रतिवर्ष अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है जिनमें दषहरा के अतिरिक्त लोहड़ी, बैसाखी एवं दीपावली प्रमुख है। लोहड़ी एवं बैसाखी पर्व में समाज के सदस्य संस्था भवन में भांगड़ा, गिद्दा की टाॅप पर पर्व को उत्साह पूर्वक मनाते हुये अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठाते हैं। लोहड़ी पर्व पर पिछले वर्ष में विवाहित जोड़ों का सम्मान किया जाता है। इसी प्रकार सदस्य दीपावली मिलन के अवसर पर संस्था भवन में आयोजित कार्यक्रमों का आनंद उठाते हैं तथा प्रीतिभोज में सम्मिलित होते हैं। इन धार्मिक/सांस्कृतिक कार्यक्रमों का विस्तृत विवरण निम्नलिखित हैः-


पंजाबी दषहरा - जबलपुर की शान


भारतीय संस्कृति के महानायक भगवान श्री राम की लंका विजय का प्रतीक महापर्व दषहरा वैसे तो पूरे देश में मनाया जाता है किन्तु जबलपुर संस्कारधानी में मनाया जाने वाला पंजाबी दषहरा पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है। नगर के पंजाबी समाज द्वारा मनाये जाने वाले पंजाबी दषहरा नेे जबलपुर के ऐतिहासिक दषहरा में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। कहने को तो पंजाबी दषहरा पंजाबी भाईयों द्वारा आयोजित किया जाता है किन्तु पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर की गौरवषाली परंपरा एवं सामाजिक सौह्ाद्र के अनुरूप सभी वर्ग के नागरिक पंजाबी दषहरा में हर्षोउल्लास के साथ भाग लेते हैं। सन् 1950-51 में पहली बार पेषकारी स्कूल में पंजाबी दषहरा मनाने की योजना का श्रीगणेश किया गया। पहली बार में ही रावण का स्वरूप विषाल हो गया। जिसके कारण रावण दहन जहाॅं आज पुलिस कंट्रोल रूम है उस स्थान में किया गया। सन् 1953 में जिला प्रषासन ने मुख्य दषहरा चल समारोह के एक दिन पूर्व पंजाबी दषहरा जुलूस निकालने के लिए पहल की। उसी वर्ष से शारदेय नवरात्र की नवमी को पंजाबी  दषहरा और जुलूस निकलने लगा।


जहाॅं आज पुलिस कंट्रोल रूम है वहाॅं समतल मैदान में पंजाबी दषहरा मनाने के बाद सन् 1953-54 से जिला प्रषासन ने घण्टाघर के पास एन.सी.सी. मैदान दषहरा मनाने के लिए उपलब्ध कराया। दषहरा पर्व में पंजाबी भाईयों के साथ सिंधी एवं सिख भाई भी इस उत्सव में सार्वजनिक रूप से सम्मिलित होते रहे। एन.सी.सी. मैदान में नाले एव लकड़ी का कच्चा रास्ता भी कार्यकर्ता अपने हाथों से बनाया करते थे। मैदान में बल्लियाॅं लगाकर रावण को खड़ा करना भी जोखिम पूर्ण कार्य रहा जिसे समाज के ही सदस्य किया करते थे।


पंजाबी समाज के गणमान्य जिनकी पंजाबी दषहरे के आयोजन में अहम् भूमिका रही:-


सन् 1950-57    संयोजन     ः    श्री मनोहर लाल साहनी, अध्यक्षता श्री रामचन्द्र बत्तरा
सन् 1952-53    संयोजन     ः    श्री संत राम सचदेवा
सन् 1954         संयोजन     ः    सरदार अतर सिंह मिनोचा
सन् 1955         संयोजन     ः    श्री मलिक सीताराम
सन् 1956         संयोजन     ः    श्री देवीदयाल नरूला

सन् 1957 से 1962 तक श्री चन्द्र प्रकाश पाहवा ने भी सचिव पद पर रहकर योगदान दिया तथा पंजाबी दषहरे को आगे बढ़ाने में स्व. चरनजीत साहनी की उल्लेखनीय सेवाएॅं प्राप्त हुई। सन् 1962 से 1979 तक दषहरा सनातन धर्म मंदिर छोटी ओमती से प्रारंभ हुआ था। सन् 1980 में तरूणाई के प्रतीक उत्साही सर्वश्री प्रेमचावला, नरेन्द्रपाल मलिक, केवल कृष्ण मलिक, राधेष्याम डाॅंग, सीताराम डाॅंग एवं उनके सहयोगी साथियों ने पंजाबी दषहरा की बागडोर संभाली। वर्तमान में पिछले कई दषकों से पंजाबी दषहरा पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन द्वारा नगर के पंजाबी समुदाय के गणमान्य सदस्यों के सहयोग द्वारा अत्यन्त गरिमामयी एवं उत्साहपूर्ण वातावरण में अत्यन्त भव्य रूप में पं. रवि शंकर शुक्ल स्टेडियम में मनाया जाता रहा है।


दीपावली मिलन समारोह


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन जबलपुर द्वारा प्रतिवर्ष दीपावली उत्सव के पष्चात् समाज का दीपावली मिलन समारोह अत्यन्त उत्साह पूर्वक संस्था भवन में अत्यन्त भव्य रूप में आयोजित किया जाता है। इस समारोह में विषेषकर पंजाबी समाज की विभूतियों को समाज षिरोमणी, समाज रत्न, समाज गौरव, समाज विभूति, समाज महिला रत्न अलंकरण प्रदान कर उन्हें सम्मानित किया जाता है संस्था द्वारा अभी तक संलग्न विवरण में दर्षाये गये पंजाबी समाज की विभूतियों का सम्मान किया जा चुका है। इसी अवसर पर समाज के शिक्षा क्षेत्र में विषेष योग्यता प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं, पंजाबी दषहरा में उत्कृष्ठ सेवा प्रदान करने वाले कार्यकर्ताओं आदि का भी सम्मान किया जाता है। समारोह में आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम अत्यन्त भव्यता से आयोजित किये जाते हैं। समारोह में क्विज, हौजी इत्यादि के खेलों में आमन्त्रित सदस्यगण एवं उनके परिवार उत्साह पूर्वक भाग लेते हैं। समारोह के अन्त में संस्था द्वारा आमंत्रित सदस्यों एवं उनके परिवारजनों हेतु विविधता पूर्ण व्यंजनों से सुसज्जित अत्यन्त सुरूचिपूर्ण रात्रि भोज का भी प्रबंध किया जाता है। समारोह में सभी का योगदान, उत्साह, आनंद देखते ही बनता है।


लोहड़ी उत्सव समारोह


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन जबलपुर की परम्परा के अनुरूप प्रतिवर्ष 13 जनवरी के पष्चात् पंजाबी समाज की संस्कृति के प्रतीक लोहड़ी उत्सव समारोह का आयोजन किया जाता है। जिसमें समाज से सदस्य सपरिवार सम्मिलित होकर उत्सव को अत्यन्त उत्साह एवं आनंद के साथ मनाते हैं। इस उत्सव में उपस्थित सदस्यों एवं उनके परिवारों द्वारा लोहड़ी के पूजन के पष्चात् लोहड़ी के गीत गाते हुए लोहड़ी  प्रज्जवलित की जाती है तथा चिवड़ा, मक्की के फुल्के, रेवड़ी, मूंगफली आदि की आहूति देकर इसके प्रसाद का वितरण किया जाता है। इस अवसर पर अनेक आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करते हुये नव-विवाहित युगलों का सम्मान किया जाता है एवं उन्हें समाज के बुजुर्गों द्वारा आषीर्वाद देते हुए उनके मंगलमय वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है। समारोह का समापन स्वरूचिपूर्ण भव्य रात्रि-भोज द्वारा किया जाता है जिसमें समाज के सदस्य सपरिवार बड़ी संख्या में अत्यंत उत्साह पूर्वक भाग लेते हैं।


बैसाखी उत्सव समारोह


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा अपनी परम्परानुसार प्रतिवर्ष 14 अप्रैल के पष्चात् पंजाबी समाज की संस्कृति की पहचान बैसाखी उत्सव का अत्यन्त भव्यता से आयोजन किया जाता है। बैसाखी उत्सव कभी पं. रवि शंकर स्टेडियम, कभी मानस भवन में अत्यन्त गरिमापूर्ण सामाजिक सोह्ाद्र के वातावरण में मनाया जाता है। इस उत्सव की भव्यता को पंजाब से आई भांगड़ा, गिद्दा नृत्यों की टीमों की एवं स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियाॅं चार चाॅंद लगा देती हैं। समाज के सदस्य एवं उनके परिवारजन बड़ी संख्या में बैसाखी पर्व के गीत, संगीत व नृत्यों का भरपूर आनन्द उठाते हुए एक दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं तथा संस्था द्वारा आयोजित भव्य सुरिूचिपूर्ण रात्रि-भोज में सम्मिलित होकर आनंद उठाते हैं।


श्री गणेश मंदिर का संचालन


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन जबलपुर के भवन परिसर में एक भव्य श्री गणेश मंदिर की स्थापना की गई है जिसमें सिद्धि-विनायक श्री गणेशजी की अत्यन्त मनोहारी मूर्ति की नियमित पूजा-अर्चना की जाती है। मंदिर हेतु एक पंडितजी नियुक्त है जो भगवान श्री एकदंत गणेषजी की नियमित रूप से सुबह-षाम आरती/पूजा करते हैं तथा प्रसाद का वितरण करते हैं। समाज के सदस्य भी प्रतिदिन भगवान का आषीर्वाद ग्रहण करते हैं तथा संस्था भवन में होने वाले मंगल कार्यों के आयोजन में भी मंदिर में भजन, पूजन, अर्चना नियमित रूप से किये जाते हैं। प्रतिवर्ष फरवरी माह में मंदिर के स्थापना दिवस का समारोह आयोजित किया जाता है जिसमें भव्य भंडारे का आयोजन किया जाता है।


सामाजिक उत्थान के अन्य कार्य


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा नियमित रूप से अनेक धर्माथ सामाजिक कार्यों को संपन्न किया जाता है जिनमें शिक्षा उत्थान हेतु गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता, कमजोर वर्गों के सदस्यों को चिकित्सा सहायता, विधवाओं को आर्थिक सहायता, ब्लड डोनेषन कैम्प/मेडिकल कैम्प इत्यादि का आयोजन सम्मिलित है। इनके अतिरिक्त अन्य प्रमुख सामाजिक सहायता, धार्मिक कार्यक्रमों की निम्नलिखित गतिविधियाॅं संस्था द्वारा संचालित की जाती हैं।


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन, जबलपुर द्वारा पंजाबी समाज की विभूतियों की सम्मान सूची (नवम्बर 2016)
वर्ष 1993 से 2016 तक


 

पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन इतिहास के आईने में समाजसेवी जिन्होंने संस्था की बागडोर संभाली


पंजाबी हिन्दू एसोसिएषन की स्थापना वर्ष 1934 में हुई। संस्था की स्थापना के पष्चात् संस्था के व्यवस्थित संचालन हेतु समाज की निम्नांकित उदीयमान प्रतिभाओं ने इसका नेतृत्व किया तथा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, सहसचिव, कोषाध्यक्ष तथा आॅडीटर एवं कार्यकारिणी समिति के विभिन्नों पदों कोे सुषोभित किया।


 

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